जयपुर। जलदाय विभाग में लम्बे समय से पुराने नियम एवं उनमें स्पष्टता के अभाव के कारण जल प्रदाय योजनाओं की क्रियान्विति में देरीेे को देखते हुए सरकार द्वारा इस दिशा में पहल करते हुए ठेकेदारों व विभाग के अधिकारियों द्वारा वार्ता कर आवश्यक सुधारात्मक सर्कुलर जारी कर योजनाओं के क्रियान्वयन में शीघ्रता लाने व निविदा प्रक्रिया सरलीकरण के विभिन्न कदम उठाये गये है। इनमें जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण के कार्यो में निविदा अवधि 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष करना मुख्य कदम है। विभाग द्वारा पूर्व में जल योजनाओं के संचालन एवं संधारण के कार्यो में निविदा अवधि 5 वर्ष निर्धारित की गई थी इस कारण निविदाऍ बार-बार असफल हो रही थी एवं पेयजल योजनाओं के संचालन एवं संधारण का कार्य बाधित हो रहा था। वर्तमान सरकार द्वारा संचालन एवं संधारण निविदा की अवधि 3 वर्ष करने के साथ ही निविदाओं में वित्तीय एवं तकनीकि पात्रता में भी छूट दी गई है। इसी प्रकार कैपीटल कार्यो हेतु निविदा की पात्रता शर्तो में स्पष्टता लाई गई है एवं वित्तीय पात्रता में छूट एवं बिडिंग कैपेसिटी गणना का सरलीकरण करते हुए पात्र ठेकेदारों का दायरा बढाया गया है। उक्त कदम से निविदाओं में अधिक संख्या में पात्र ठेकेदारों को सम्मिलित होने का मौका भी मिलेगा एवं निर्बाध रूप से योजनाओं का संचालन एवं संधारण हो सकेगा साथ ही निविदाओं में उचित प्रतियोगिता से कार्यो की लागत में कमी होना भी सम्भावित है। मुख्य अभियन्ता (तक) एवं त.स. आर. डब्लू. एस. एस. एम. बी. श्री डी.के सैनी ने बताया कि विभाग में अतिरिक्त परर्फोमेन्स सिक्योरिटी का प्रावधान लागू करने से विभाग के कार्यो की गुणवत्ता बढेगी तथा निविदाओं में अनावश्यक नीची दरें डालकर कार्य को अपूर्ण छोडकर जाने वाले ठेकेदारों पर अंकुश भी लगेगा। इसी प्रकार निरस्त की गई निविदाओं के पुनः निविदा आमंत्रण के सम्बन्ध में दिशा निर्देश जारी कर स्पष्टता लाई गई है, साथ ही संशोधित प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के सम्बन्ध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए है।

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