बारहवीं के बाद स्नातक में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. ऐसे में अधिकतर छात्रों की इच्छा होती है कि वे अच्छे से अच्छे संस्थान में प्रवेश लें. कई विश्वविद्यालय जहां स्नातक के कोर्सेज में प्रवेश का आधार बारहवीं में प्राप्त अंक होते हैं, तो कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर प्रवेश देते हैं. कई संस्थानों में शैक्षणिक सत्र नियमित नहीं होते. इसका परिणाम छात्रों को भुगतना होता है. ऐसे में प्रवेश लेने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, जिससे भविष्य में परेशानी का सामना न करना पड़े.

यूनिवर्सिटी या कॉलेज की असल जिंदगी बारहवीं के बाद शुरू होती है. यही वह वक्त होता है, जब आपके कैरियर की नींव पड़ती है, जो बाद में चलकर आपकी पहचान बनती है. चाहे वह विषय को लेकर चुनाव हो या फिर कोर्स को लेकर, पढ़ाई के लिए किसी खास संस्थान के चुनाव की बात हो या फिर अपने शहर के बेहतरीन संस्थान में पढ़ाई करने की इच्छा, सभी कुछ का प्रभाव आपके आनेवाली जिंदगी पर पड़ेगा. जाहिर-सी बात है कि यह चुनाव काफी अहमियत वाला होता है और इसी पर जिंदगी और कैरियर का हर मसला टिका होता है.
लॉन्ग टर्म प्लानिंग आवश्यक
बारहवीं के बाद कोर्स भी अलग हो जाते हैं. किसी को स्नातक के बाद कोई छोटी-मोटी नौकरी करने की जरूरत होती है, किसी को उच्च अध्ययन की लालसा होती है और वे अपने छोटे से शहर से बाहर निकल कर कैरियर के एक अलग रास्ते पर चलना चाहते हैं. किसी की इच्छा एक शिक्षक बनने की होती है, तो वह चाहते हैं कि स्नातक के बाद बीएड करें और फिर शिक्षक बन जायें. कोई संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में बैठना चाहता है, तो कोई कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में सफल होकर केंद्रीय सेवाओं में जाना चाहता है. कोई स्नातक के बाद मास्टर और पीएचडी करने की सोचता है और वह इसके लिए मन से तैयार होता है. सपने देखना बुरी बात नहीं है, लेकिन उसे पाने के लिए लॉन्ग टर्म प्लानिंग करना आवश्यक है और बारहवीं के बाद यह योजना बनाने का सही समय होता है.
निर्णय लेने से पहले करें रिसर्च
जिंदगी को लेकर आपके जो सपने हैं, उनको लेकर सतर्क हों. आप क्या करना चाहते हैं, उसे लेकर किसी भी तरह के उधेड़बुन में न रहें. जो बनना चाहते हैं, उसको लेकर थोड़ा रिसर्च करें. अपने घर में जो बड़े हैं, उनसे सलाह लें. जिस फील्ड में जाना चाहते हैं, उस फील्ड में यदि कोई परिचित हो, तो उनसे बातचीत करें. उस फील्ड के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को समझें. इंटरनेट भी खंगालें. एक बात का ध्यान रखें कि तमाम तरह के प्रोफेशनल कोर्स एक अलग तरह की काबिलियत की मांग करता है, ऐसे में उन काबिलियत को समझें. आपमें वे काबिलियत हैं या नहीं, खुद विचारें. किसी के बहकावे में न आयें या फिर देखादेखी न करें. किसी के दबाव में न पड़ें.
संस्थान की जानकारी हासिल करें
यदि आपने विषय और कोर्स की पढ़ाई को लेकर निश्चय कर लिया है, तो एक बार जिन संस्थान या विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने जा रहे हैं, उनकी तहकीकात कर लें. छात्रों को सबसे अधिक परेशानी शैक्षणिक सत्र और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर होती है. राज्य और देश में कई ऐसे विश्वविद्यालय हैं, जहां का शैक्षणिक सत्र सही नहीं है और न ही प्रेक्टिकल के लिए लैब ही उपलब्ध है।
वहां न तो नियमित तौर पर क्लास होती है और न ही परीक्षाएं. कई-कई विश्वविद्यालयों में सत्र इतना पीछे होता है कि तीन वर्षीय स्नातक की डिग्री हासिल करने में छात्रों को चार से पांच वर्ष लग जाते हैं, ऐसे विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से बचें. जाहिर-सी बात है कि यदि नियत समय में आपको स्नातक की डिग्री मिल गयी, तो बचे समय में आप मन लगाकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर सकेंगे.
डिग्री को नहीं पढ़ाई को दें अहमियत
कई बार छात्र ऐसे शिक्षण संस्थानों में एडमिशन को प्राथमिकता देते हैं, जहां क्लास नहीं करनी पड़ती या अटेंडेंस पूरा करने की आवश्यकता नहीं होती. छात्र सोचते हैं कि अमुक संस्थान में क्लास करने का झंझट नहीं है और जब तक स्नातक की डिग्री मिलेगी, तब तक वे किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करेंगे और उसमें सफल होने के बाद जिंदगी बन जायेगी. यह प्रवृत्ति काफी खतरनाक है, क्योंकि कॉलेज जाने, क्लास करने और टास्क पूरा करने का जो संघर्ष है, वह आप नहीं समझ पाते हैं. आपने अपने कोर्स के साथ न्याय नहीं किया और इसका प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर पड़ता है . इसलिए कभी भी शार्टकट न अपनायें.
कॉलेज या यूनिवर्सिटी चुनने की शुरुआत करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखें :
  • पूरी तरह से पता करें कि जिस कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले रहे हैं वो मान्यता प्राप्त है या नहीं.
  • कॉलेज में एडमिशन का कट ऑफ परसेंटाइल.
  • कॉलेज में छात्रों की संख्या और उनके बैकग्राउंड के बारे में समझें.
  • कॉलेज की वेबसाइट के अलावा उसकी सोशल मीडिया प्रजेंस पर भी ध्यान दें, जहाँ से आपको पता चलेगा कि वहाँ के छात्र किन चीज़ों से खुश या नाख़ुश हैं.
  • फैकल्टी की विस्तृत पड़ताल करें, योग्य शिक्षकों के बिना बात नहीं बनेगी.
  • मौजूदा छात्रों और हाल ही में ग्रेजुएट हुए लोगों से बातचीत ज़रूर करें, इसमें पूर्व छात्रों के टेस्टिमोनियल और इंटरनेट पर मौजूद स्टूडेंट फोरम बेहद मददगार होते हैं.
  • पिछले 5 वर्षों का प्लेसमेंट रिकॉर्ड और इंटर्नशिप देने वाली कंपनियों की लिस्ट की जानकारी हासिल करें.
  • कैंपस के बारे में पता करें, हो सके तो खुद जाकर या वर्चुअल टूर की मदद से जानकारी लें.
  • यूनिवर्सिटी या कॉलेज की NAAC द्वारा प्रदत्त ग्रेड की जांच करें. ये A++, A+, A अथवा B या C ग्रेड की यूनिवर्सिटी/कॉलेज है.
  • साथ ही यह भी जांच करें कि NIRF की रैंकिंग में यूनिवर्सिटी या कॉलेज कितने नम्बर पर है.

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