ले लो दहेज कोई बात नहीं,
पर जान लो तुम्हारी कोई औकात नही !

खेतों को रख गिरवी यह पैसा आया है,
पर फिर भी तुम्हारा मन नही भर पाया है !

क्या किसी की बेटी थी प्रयाप्त नही ?
या तुम्हारे फरमाइशों को था कुछ प्राप्त नही ?

दहेज के पैसों का धौस  दिखाओगे….
क्या इससे तुम तुम अपनी शान बढ़ा पाओगे…?

न जाने ये दहेज कितनी बेटीयों को खा गई,
एक पिता की पुत्री जनने का दुख जता गई !

क्यों करते हो अपना मोल-भाव ?
क्यो घटाते हो अपना ही प्रभाव ?

“पैसों वाली” नही साक्षात  लक्ष्मी का स्वागत करो ,
बिना दहेज वाली शादियों  से समाज को अवगत करो !

पिता अपना कलेजा निकाल आपको दे देता है,
अपना जीवन का टुकड़ा पुत्री तुमको सोप देता हैं

बंद करो दहेज लेना’ सुकून की कन्या अपनाओ,

लेखक – श्रवणसिंह बावडी

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