भोपाल. हर साल छह किमी की रफ्तार से अपना आकार बढ़ा रहे भोपाल शहर के नए प्लानिंग एरिया कैसे हों, कहां बिजनेस हब बनें और कहां एनवॉयरमेंट हब बनने चाहिए, नई सरकार ने इस पर काम शुरू कर दिया है। सबसे जरूरी कंपोनेंट मास्टर प्लान को जमीन पर लाने की कवायद भी इसलिए दोबारा शुरू हो गई है। मंत्री जयवर्धन सिंह ने नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग संभालने के सप्ताह भर बाद ही इस मुद्दे पर अफसरों से लंबी चर्चा की थी।

टीएनसीपी ने अपने प्रजेंटेशन में दिखाया है कि कैसे इस बार प्लानिंग एरिया तय करने के लिए जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम सर्वे को आधार बनाया जा रहा है। हैदराबाद की निजी कंपनी भोपाल सहित प्रदेश के 32 शहरों के लिए जीआईएस सर्वे कर रही है। अब तक भोपाल सहित 8 शहरों की प्रारंभिक जानकारियां टीएंडसीपी को मिल चुकी हैं। जीआईएस सर्वे में होशंगाबाद रोड और इंदौर राजमार्ग से सटी जमीनों को उद्योग धंधों के लिए उपयुक्त बताया गया है।

इन इलाकों में नए बिजनेस हब बनाने और ऑटोमोबाइल, बैंकिंग आईटी कंपनियों के लिए जमीनें आवंटित करने पर जोर दिया गया है। सर्वे में बड़ा तालाब, छोटा तालाब, शाहपुरा सहित अनेक स्थानों पर नए एनवॉयरमेंट जोन बनाने की बात शामिल है। जयवर्धन सिंह ने इन सभी मुद्दों को नियमों में बदलने से पहले पब्लिक कंसलटेंसी कराने को कहा है।

जीआईएस सर्वे में क्या नया
नए मास्टर प्लान के नाम पर शहरों में केवल पुराने नियमों में संशोधन किए जाते थे। शहर जिस दिशा में बढ़ता था, वहां नए रहवासी-व्यवसायिक क्षेत्रों की जमीनें आरक्षित करने तक कार्रवाई सीमित रहती थी।
पहली बार शहर के 2764 वर्ग किमी क्षेत्र को जीआईएस सर्वे से परखा जा रहा है। इसमें चारों दिशाओं में उद्योग, एनवायरमेंट, रहवासी, व्यवसायिक और पर्यावरण गतिविधियों को बढ़ावा देने जमीनें चिन्हित होंगी।
जीआईएस सर्वे का आइडिया टीएनसीपी की अर्बन डेवलपमेंट वर्कशॉप में आईं बैंगलूरु के अर्बन एक्सपर्ट रंजीत मैथ्यू ने दिया था। कलेक्टर-नगर निगम आयुक्तों की ये वर्कशॉप नरोन्हा अकादमी में पिछले साल हुई थी
जीआईएस सर्वे ये बताता है कि शहर किस दिशा में किस कारण से बढ़ रहा है। कहां उद्योग लगाने की जरूरत है और किस जमीन खाली छोड़ देना चाहिए।
जीआईएस प्लानिंग पर बैंगलोर, हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई जैसे शहर काम कर रहे हैं। प्रदेश में भोपाल सहित 32 शहरों के लिए ये सर्वे अभी प्रारंभिक चरण में पहुंचा है।
जीआईएस सर्वे के बगैर प्लानिंग करने का खामियाजा भुगत रहा है। वहां आईटी कंपनियों के हब तक कनेक्टिविटी नहीं होने से उद्योग समूह वापस लौट रहे हैं।

हमने वचनपत्र में सुनियोजित विकास की बात की है। मास्टर प्लान इसका जरूरी कंपोनेंट है। टीएंडसीपी ने जीआईएस सर्वे की जानकारी दी है। नए नियमों का प्रकाशन जनता से रायशुमारी के बाद करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
जयवर्धन सिंह, नगरीय प्रशासन मंत्री

हैदराबाद की आईटी फर्म जीआईएस सर्वे कर रही है। कुल 32 शहरों में से आठ शहरों की प्रारंभिक जानकारियां मिल गई हैं। भोपाल का मास्टर प्लान इस साल लाने का प्रयास है, ताकि समय से इस पर अमल शुरू किया जा सके।
राहुल जैन, संचालक, टीएनसीपी

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