आदरणीय गुरुवर वेदांताचार्य ध्यानाराम जी महाराज को हम बेजोड़ प्रतिक्रियाओं के बादशाह भी कह सकते हैं और समाज सुधारक के अप्रतिम उदाहरण भी. इस पर और बात कहने से पूर्व आइए आदरणीय गुरुवर डॉ. ध्यानाराम जी महाराज जी जिनका आज जन्मदिन है, को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देते चलें.
सम्पूर्ण समाज के प्रिय
*डॉ. ध्यानाराम जी महाराज*
सजता रहे खुशियों से समाज
…………..हर ख़ुशी सुहानी रहे,
आप समाज मे इतना ज्ञान बिखेरे
कि हर ख़ुशी आपकी दीवानी रहे.
फूल खिलते रहे हर महकमें की राह में,
हंसी चमकती रहे आपकी निगाह में,
कदम-कदम पर मिले ख़ुशी की बहार आपको.
दिल करता है यही दुआ बार-बार आपको.
हम बात कर रहे थे डॉ. ध्यानाराम जी महाराज के बेजोड़ प्रतिक्रियाओं की. आपने अक्सर नशा मुक्ति अभियान और युवा जाग्रति की बेजोड़ प्रतिक्रियाएं देखी होंगी. हम कुछ ताज़ा उदाहरण दे रहे हैं-
”जीवन एक प्रतिध्वनि है. यहां सब कुछ वापस लौट कर वापिस आता है. अच्छा-बुरा, झूठ-सच. जीवन का वास्तविक स्वरूप और मानव जीवन में संवदेनशीलता की स्तिथि, उक्त कथन के मर्म को शायद आपने जीवन में पूर्ण रूप से उतार लिया है और आप इस जग को अच्छा-से-अच्छा संकीर्ण मानसिकता मुक्त जीवन ही देना चाहते हैं. डॉ. ध्यानाराम जी महाराज के व्यक्तित्व को यदि देखा जाए, तो सबकुछ धनात्मक ही है, चाहे हम उनकी सोच की वैज्ञानिकता, तर्कशीलता, व्याहारिकता एवं सकारात्मकता को देखें सब में धनात्मक गुण ही प्रधान है, जो उनकी सोच को एक ठोस प्लेटफार्म प्रदान करता है, जिसपर एक विशाल इंसानियत का भवन रिश्तों की मजबूत ईंट से जुड़कर खड़ा हो जाता है. ऐसे व्यक्तित्व के जन्मञदिन पर मेरी ओर से व हरे पेड़ों की कतार की स्वच्छ मदमस्त बयार की, नदियों के बहते निर्मल जल की, पर्वत पर लहराते उपवन की, कोयल की कूक की मृगों के उछल-कूद की, रिश्तों के मजबूत डोर की, इंशानियत के पुनर्जीवित होने की उम्मीद की ओर से डॉ. ध्यानाराम जी महाराज को जन्मदिन की अनंत हार्दिक शुभ कामनाएं”.
विश्वास के पंख
”मेरे जुनूं का नतीजा जरूर निकेलेगा,
इसी स्याह समुद्र से नूर निकेलेगा.
लगन और विश्वास से किया गया काम,
कभी विफल नहीं हो सकता है.
परिस्थितियां चाहे जैसी हों,
यदि कर्म की शाख को पूरे मनोयोग से हिलाया जाए,
तो सफलता के फूल अवश्य ही गिरते हैं.
डॉ. साहब की जीवन कथा भी यही कहती है. सर ने अपने रास्ते में पड़ने वाले समस्त बाधाओं के पहाड़ को, अपने फौलादी इरादे के हथौड़े से तोड़ कर सहज सरल रास्ता बनाकर अपनी मंजिल के उच्चततम सोपान तक पहॅुचने में सफलता प्राप्त की और राजपुरोहित समाज के युवाओं को नई दिशा में अग्रसर किया.
हर राजपुरोहित युवा शख्स जीने की कला भी आने लगी है
”बहुत सुन्दर नज्म. जीवन को जीने व उसको समझने की कुंजी है ये नज्म.
जिन ढूंढा तिन पाइया गहरे पानी पैठ.
बात चाहे मोती की हो या ज्ञान या फिर जिंदगी जीने के फलसफे सबके के लिये डूबना ही पड़ता है. बिन डूबे आप दो पैर के जानवर तो बन सकते हैं, आदमी कहलाने लायक योग्यता आप में कतई नही होगी. कहीं पढ़ी कविता की चार लाइनें-
नफरत का भाव ज्यों ज्यों खोता चला गया,
मैं रफ्ता -रफ्ता आदमी होता चला गया,
फिर हो गया प्यार की गंगा से तर बतर,
गुजरा जिधर से सबको भिगोता चला गया”.
बुद्धं शरणं गच्छामि
”पूरे विश्व में बुद्व ही ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने कहा, कि मेरी पूजा मत करना, न ही मुझसे कुछ उम्मीद लगा के रखना, कि मैं कोई चमत्कार करूंगा. दुख पैदा तुमने किया है और उसको दूर तुम्हें ही करना पड़ेगा. मैं सिर्फ तुम्हें मार्ग बता सकता हूं, क्योंकि उस मार्ग पर चला हूं, लेकिन उस रास्ते पर तुम्हें स्वयं ही चलना पड़ेगा. मैं मार्गदाता हूं मोक्षदाता नहीं. इस प्रकार बुद्व ने तत्समय के पुरोहितवाद विरोध करते हुए हर व्यक्ति को स्वयं अपना भाग्य निर्माता, मोक्षदाता बनने के लिए कहा, जिसमें किसी बिचौलिए के लिए कोई स्थान नहीं था”.यही धारणा आज डॉ. साहब राजपुरोहित समाज में स्थापित कर रहे है.
हमे गर्व है कि हम ऐसे समाज का हिस्सा है जिसका नेतृत्व डॉ. साहब जैसे कोहिनूर के कर्मठ हाथों में है

”इंसान अपने विचारों से निर्मित प्राणी है, वो जैसा सोचता है वैसा बन जाता है. सोच हमारे व्यक्तित्व को चहुं ओर से प्रभावित करती है. सकरात्मक सोच से विकास धनात्मक दिशा में होती है, जबकि इसके उलट नकारात्मक सोच व्यक्तित्व को विखंडित कर व्यक्ति के साथ समाज के विकास को भी बाधित करते हैं अर्थात सकारात्मकता व्यक्तित्व व विकास के लिए आवश्यकक तत्त्व है क्योंकि एक सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अदृश्य को देख लेता है, अमूर्त को महसूस करता है और असंभव को पा लेता है. विशेष शिविरों से निरंतर एक मिशन के रूप में अपने अनमोल वचन के माध्यम से पाठकों के मन व विचारों में सकारात्मक गुणों के विकास के लिए सतत प्रयत्नरशील है”.
”प्रार्थना और विश्वास दोनों आदृश्य है, परंतु दोनों में इतनी ताकत है कि नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं. डॉ. साहब में प्रार्थना एवं विश्वास दोनों ही मौज़ूद हैं, जिससे उनकी अंतःदृष्टि और बाह्यदृष्टि दोनों ही प्रबल हैं, जो उनकी काम के प्रति लगन और दृढ़ इच्छा ईमानदारी में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होती है. वे आज के भटके समाज के दलदल में खिला कमल के समान हैं, जिनसे कुछ आस जगती है”.
एक बार और जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं

Bharat singh rajpurohit

Writer & Entrepreneur

Www.bharatraj.guru

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