मरुधर भारती नेटवर्क
उदयपुर: कहानी हैं उदयपुर जिले के थामला गाँव की मंजू जोशी की जिसके दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद पैरों से लिखना सीखकर हर सप्ताह रिपोर्ट तैयार कर रहीं हैं। जिसके साथ विवाह बंधन में बंध सात फेरे लिए उसी ने इतनी यातनाएं दी की उसने अपने दोनों हाथ ही खो दिए फिर भी मंजू का हौसला नहीं टूटा और 2007 में ससुराल छोड़ महिला अधिकारिता विभाग से बतौर साथिन जुड़ी।आज मंजू पैरों से लिख कर हर सप्ताह रिपोर्ट तैयार करती है साथ ही महिलाओं को घरेलू हिंसा व कन्या भ्रूण हत्या जैसे मुद्दों पर जागरूक करती है। दो साल पहले ही 10वीं पास करने वाली मंजू आज प्रेरणा बनी हुई हैं।

यही नहीं ब्लकि ऐसी कई महिलाएं है जिनके साथ कई अमानवीय घटनाएं हुई हैं वे आज खुद के दम पर कुछ कर दिखा रही हैं। काफी सारी परेशानियों और यातनाओं को सहकर इन्होने हार नहीं मानी बल्कि अपनी कमजोरियों को अपनी ताकत बना कर जीना सीखा और मिसाल कायम की। आज यह महिलायें दूसरी असहाय और बेबस महिलाओ की प्रेरणा बन कर दूसरों को जीना सीखा रही है।

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