श्री हनुमच्छिव दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव भव्य एवं ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न

पश्चिमी चंपारण (बिहार), फरवरी 18 : ग्राम तरकुलवा, पोस्ट बेलवा मोड़, प्रखंड बगहा, जिला पश्चिमी चंपारण (बिहार) में श्री सीताराम हनुमत् सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित “श्री हनुमच्छिव दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव” दिनांक 4 फरवरी 2026 से 7 फरवरी 2026 तक अत्यंत भव्य, दिव्य एवं श्रद्धापूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस महोत्सव में श्री हनुमान जी, माँ दुर्गा एवं शिवलिंग की नूतन मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विधिवत् सम्पन्न की गई।यह मंदिर निर्माण स्वर्गीय पिता जी के उस पावन स्वप्न की पूर्ति है, जिसे उनके सुपुत्र डॉ. नीरज कुमार पांडेय, जो कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी के प्रमुख पुजारियों में से एक हैं, ने अपनी श्रद्धा, संकल्प और अथक प्रयासों से साकार किया। अपने पिता के स्वप्न को पूर्ण करने का यह भावनात्मक एवं आध्यात्मिक प्रयास पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया।चार दिवसीय इस महोत्सव के दौरान 4 फरवरी को जलयात्रा, मंडप प्रवेश, पंचांग पूजन एवं कथा प्रवचन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 5 फरवरी को वेदी पूजन, अधिवास, नगर भ्रमण एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। 6 फरवरी को नूतन मंदिर में देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा, हवन एवं महाआरती का आयोजन हुआ। 7 फरवरी को यज्ञ पूर्णाहुति, प्रसाद वितरण, साधु भंडारा एवं हनुमद्ध्वज (मंदिर ध्वज) पूजन के साथ महोत्सव का समापन हुआ।इस पावन अवसर पर आसपास के सभी गाँवों के श्रद्धालुजन पूरे उत्साह और समर्पण के साथ आगे आए। ग्रामवासियों ने तन-मन-धन से सहयोग प्रदान किया तथा प्रत्येक दिन के आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई। महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों ने मिलकर व्यवस्थाओं को सफल बनाया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और भाईचारे का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।इस यज्ञ में पधारे हुए महानुभावों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। चार दिनों तक पूरे ग्रामवासी एवं श्रद्धालुजन भंडारा रूपी प्रसाद ग्रहण करते रहे। ट्रस्ट के द्वारा निराश्रित बुजुर्गों, असहाय दिव्यांग जनों एवं महिलाओं को साड़ी, कंबल एवं धोती का वितरण किया गया।इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में डॉ. नीरज कुमार पांडेय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।ओड़िशा के राजगंगपुर से पधारे श्री अजय कुमार साहू जी का विशेष उल्लेख आवश्यक है, जिन्होंने अपने धन एवं हृदय से इस मंदिर निर्माण एवं महोत्सव में सर्वाधिक योगदान दिया। उनका समर्पण एवं सेवा भाव सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहा।मंदिर निर्माण की पूर्णता पर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री नीति पांडेय जी एवं अन्य सम्मानित सदस्यों श्री राधेश्याम पांडेय जी, श्री प्रणव पांडेय जी तथा श्री अमरनाथ उपाध्याय जी को भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गया, जिनके सक्रिय सहयोग, मार्गदर्शन एवं समर्पण से यह दिव्य कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।साथ ही, समिति के सचिव श्री नागमणि द्विवेदी जी, प्रधान कोषाध्यक्ष श्री मनोज त्रिपाठी जी,सह कोषाध्यक्ष श्री पवन द्विवेदी जी, संयोजक श्री अरविंद द्विवेदी जी, मीडिया प्रभारी श्री मिथिलेश उपाध्याय जी एवं सह संयोजक श्री अमर राम जी के समर्पित प्रयास,उत्कृष्ट समन्वय एवं निस्वार्थ सेवा भाव की सर्वत्र सराहना की गई। इनके कुशल संचालन और अथक परिश्रम से ही यह महोत्सव सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।महोत्सव के समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक जागरण का ऐतिहासिक क्षण बताया। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सनातन संस्कृति एवं धार्मिक मूल्यों का प्रेरणास्थल सिद्ध होगा।अंत में आयोजन समिति ने सभी ग्रामवासियों, श्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया और इसे सामूहिक श्रद्धा, एकता एवं सेवा भाव का प्रतीक बताया।जय सियाराम । जय हनुमान ।

श्री हनुमच्छिव दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव भव्य एवं ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न

पश्चिमी चंपारण (बिहार), फरवरी 18 : ग्राम तरकुलवा, पोस्ट बेलवा मोड़, प्रखंड बगहा, जिला पश्चिमी चंपारण (बिहार) में श्री सीताराम हनुमत् सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजितश्री हनुमच्छिव दुर्गा प्राण प्रतिष्ठा महोत्सवदिनांक 4 फरवरी 2026 से 7 फरवरी 2026 तक अत्यंत भव्य, दिव्य एवं श्रद्धापूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस महोत्सव में श्री हनुमान जी, माँ दुर्गा एवं शिवलिंग की नूतन मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विधिवत् सम्पन्न की गई।

यह मंदिर निर्माण स्वर्गीय पिता जी के उस पावन स्वप्न की पूर्ति हैजिसे उनके सुपुत्र डॉनीरज कुमार पांडेयजो कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिरवाराणसी के प्रमुख पुजारियों में से एक हैंने अपनी श्रद्धासंकल्प और अथक प्रयासों से साकार किया। अपने पिता के स्वप्न को पूर्ण करने का यह भावनात्मक एवं आध्यात्मिक प्रयास पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया।

चार दिवसीय इस महोत्सव के दौरान 4 फरवरी को जलयात्रा, मंडप प्रवेश, पंचांग पूजन एवं कथा प्रवचन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 5 फरवरी को वेदी पूजन, अधिवास, नगर भ्रमण एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। 6 फरवरी को नूतन मंदिर में देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा, हवन एवं महाआरती का आयोजन हुआ। 7 फरवरी को यज्ञ पूर्णाहुति, प्रसाद वितरण, साधु भंडारा एवं हनुमद्ध्वज (मंदिर ध्वज) पूजन के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

इस पावन अवसर पर आसपास के सभी गाँवों के श्रद्धालुजन पूरे उत्साह और समर्पण के साथ आगे आए। ग्रामवासियों ने तन-मन-धन से सहयोग प्रदान किया तथा प्रत्येक दिन के आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई। महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों ने मिलकर व्यवस्थाओं को सफल बनाया। पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और भाईचारे का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

इस यज्ञ में पधारे हुए महानुभावों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। चार दिनों तक पूरे ग्रामवासी एवं श्रद्धालुजन भंडारा रूपी प्रसाद ग्रहण करते रहे। ट्रस्ट के द्वारा निराश्रित बुजुर्गोंअसहाय दिव्यांग जनों एवं महिलाओं को साड़ीकंबल एवं धोती का वितरण किया गया।

इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में डॉ. नीरज कुमार पांडेय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।ओड़िशा के राजगंगपुर से पधारे श्री अजय कुमार साहू जी का विशेष उल्लेख आवश्यक है, जिन्होंने अपने धन एवं हृदय से इस मंदिर निर्माण एवं महोत्सव में सर्वाधिक योगदान दिया। उनका समर्पण एवं सेवा भाव सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहा।

मंदिर निर्माण की पूर्णता पर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री नीति पांडेय जी एवं अन्य सम्मानित सदस्यों श्री राधेश्याम पांडेय जीश्री प्रणव पांडेय जी तथा श्री अमरनाथ उपाध्याय जी को भी विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया गयाजिनके सक्रिय सहयोगमार्गदर्शन एवं समर्पण से यह दिव्य कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।

साथ ही, समिति के सचिव श्री नागमणि द्विवेदी जी, प्रधान कोषाध्यक्ष श्री मनोज त्रिपाठी जी,सह कोषाध्यक्ष श्री पवन द्विवेदी जी, संयोजक श्री अरविंद द्विवेदी जी, मीडिया प्रभारी श्री मिथिलेश उपाध्याय जी एवं सह संयोजक श्री अमर राम जी के समर्पित प्रयास,उत्कृष्ट समन्वय एवं निस्वार्थ सेवा भाव की सर्वत्र सराहना की गई। इनके कुशल संचालन और अथक परिश्रम से ही यह महोत्सव सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।

महोत्सव के समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे क्षेत्र के लिए आध्यात्मिक जागरण का ऐतिहासिक क्षण बताया। यह मंदिर  केवल आस्था का केंद्र बनेगाबल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सनातन संस्कृति एवं धार्मिक मूल्यों का प्रेरणास्थल सिद्ध होगा।

अंत में आयोजन समिति ने सभी ग्रामवासियोंश्रद्धालुओं एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया और इसे सामूहिक श्रद्धाएकता एवं सेवा भाव का प्रतीक बताया।

जय सियाराम  जय हनुमान