वेदों से लेकर रामचरितमानस तक, दिल्ली में गूंजा मुरारी बापू का संदेश

Thu, 29 Jan 2026 04:17 PM (IST)
Thu, 29 Jan 2026 04:25 PM (IST)
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वेदों से लेकर रामचरितमानस तक, दिल्ली में गूंजा मुरारी बापू का संदेश
वेदों से लेकर रामचरितमानस तक, दिल्ली में गूंजा मुरारी बापू का संदेश

नई दिल्ली : प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और सनातन धर्म की प्रखर आवाज मोरारी बापू द्वारा राजधानी नई दिल्ली के 'भारत मंडपम' में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा का समापन हुआ। 17 जनवरी से 25 जनवरी तक चली इस कथा का शीर्षक 'मानस सनातन धर्म' था, जिसका समापन गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ।

वेदों सहित विभिन्न शास्त्रों का संदर्भ देते हुए मोरारी बापू ने समझाया कि सनातन धर्म ही एकमात्र शाश्वत धर्म है, जिसे किसी ऐतिहासिक तिथि या कालखंड की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह धर्म सभी आध्यात्मिक परंपराओं के सार को जोड़ता है और इसके केंद्र में सत्य, प्रेम, करुणा और अहिंसा के मूल्य समाहित हैं।

बापू ने आगाह किया कि सदियों से सनातन धर्म को कमजोर करने के कई बाहरी प्रयास हुए हैं, लेकिन आज सबसे बड़ा खतरा आंतरिक विभाजन से है। उन्होंने उन संप्रदायों पर चिंता व्यक्त की जो मनघड़ंत देवता (सनातन में जिनका कोई उल्लेख नहीं है) को स्थापित करने, बढ़ावा देने और पवित्र ग्रंथों में अनधिकृत बदलाव (क्षेपक) कर झूठी कथाएं प्रचारित कर रहे हैं।

बापू ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भले ही ऐसे संप्रदायों को अन्य शक्तिशालीगादियोंका समर्थन मिल जाए, लेकिनव्यास पीठउन्हें कभी मान्यता नहीं देगी। व्यास पीठ अनादि काल से सनातन धर्म के वास्तविक मूल्यों, शास्त्रों और भगवान राम, कृष्ण, शिव एवं मां दुर्गा जैसे आराध्य देवों के प्रति अडिग रही है।

सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथ

रामकथा के माध्यम से पूज्य मोरारी बापू ने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म की परंपरा वेदों से शुरू होकर उपनिषदों, पुराणों और भगवद गीता तक जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गोस्वामी तुलसीदास कृत 'रामचरितमानस' इस निरंतरता का अंतिम प्रामाणिक ग्रंथ है। इसके बाद लिखे गए किसी भी ग्रंथ को सनातन धर्म के मूल ग्रंथों का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

बापू ने काव्यात्मक रूप से सनातन धर्म के प्रतीकों को परिभाषित करते हुए कहा कि इसका प्रवाह गंगा है, पर्वत कैलाश है, अक्षय वृक्ष वटवृक्ष है, ग्रंथ वेद है, चक्र सुदर्शन है, शीतलता चंद्रमा है और प्रकाश स्वयं भगवान सूर्य हैं।
मानस सनातन धर्म रामकथा का शुभारंभ उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया तथा समापन सत्र को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संबोधित किया। कथा में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी शिरकत की और बापू के समक्ष यमुना नदी को पूर्णतः स्वच्छ करने का संकल्प लिया। कथा के प्रथम दिन बापू ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

विश्व शांति केंद्र के संस्थापक और प्रसिद्ध जैन आध्यात्मिक गुरु आचार्य लोकेश मुनि इस रामकथा के आयोजक रहे। बापू ने केवल कथा के माध्यम से मार्गदर्शन किया, बल्कि विश्व शांति केंद्र के निर्माण हेतु स्वयं अंशदान देकर और अपने अनुयायियों (जिन्हें वे 'पुष्प' कहते हैं) को प्रेरित कर वित्तीय सहायता भी प्रदान की।

कथा के अंतिम दिन विभिन्न धर्मगुरुओं ने शिरकत कर सनातन धर्म की उदारता और भारतीय लोकतंत्र की समावेशी भावना की सराहना की।

'मानस सनातन धर्म' मोरारी बापू की 971वीं रामकथा थी। उल्लेखनीय है कि बापू कथा के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लेते हैं। कथा और वहां परोसा जाने वाला प्रसाद (भोजन) सभी के लिए पूरी तरह निःशुल्क रहता है।

सत्य, प्रेम और करुणा के मूल्यों में रची-बसी यह राम यात्रा सनातन धर्म को मजबूत करने और रामचरितमानस के प्रकाश को जन-जन तक पहुँचाने के मिशन के साथ निरंतर जारी है।

JR Choudhary JR Choudhary serves as the Editor of Marudhar Bharti, where he leads the editorial team with a focus on accuracy, transparency, and public interest journalism. With over 8 years of hands-on experience in the media industry, he has developed a deep expertise in news analysis, regional reporting, and editorial management. His core mission is to uphold the highest standards of journalistic ethics while delivering stories that matter to the public.