यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग – 2) ठाकुर दलीप सिंघ जी

Fri, 30 May 2025 07:42 PM (IST)
Fri, 30 May 2025 07:44 PM (IST)
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यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग – 2) ठाकुर दलीप सिंघ जी
यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग – 2) ठाकुर दलीप सिंघ जी

यदि विचार किया जाए: तो आज भी विश्व के सब से बड़े भाग को गुलाम बना कर, उस पर इंग्लैंड, अमरीका आदि के अंग्रेज़ी-भाषी लोग ही शासन कर रहे हैं। इस का कारण केवल वही है, जिस का मैं यहाँ उल्लेख कर रहा हूँ : ‘इंग्लैंड का विश्व के लोगों को गुलाम बना कर, वहाँ अपना साम्राज्य स्थापित करना’ इंग्लैंड का विश्व पर साम्राज्य स्थापित होने के कारण, उन की भाषा व संस्कृति; विश्व भर में प्रचलित हो कर, सर्वमान्य हो गई है और लोगों ने भी अवचेतन मन से ही, अपनी मातृभाषा व संस्कृति छोड़ कर; उन की भाषा व संस्कृति को धारण कर लिया है। यहाँ तक कि फ्रांस, स्पेन आदि ने जिन देशों पर शासन किया था, भले ही वहाँ फ़्रांसी, स्पेनी भाषाएं चलती हैं; उन देशों का भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेज़ी के बिना राजनीतिक संबंध, व्यापार आदि संभव नहीं। आश्चर्य की बात है: रूस, फ्राँस, जर्मनी, चीन, जापान आदि जो देश इंग्लैंड के गुलाम नहीं भी हुए तथा जिन की अपनी भाषाएं बहुत समृद्ध हैं; उन्हें भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार तथा राजनीतिक संबंध स्थापित करने के लिए ‘अंग्रेज़ी’ का उपयोग करना ही पड़ता है।

भले ही कई वर्षों से इंग्लैंड का साम्राज्य बहुत देशों पर नहीं रहा; फिर भी वहाँ पर उन्हीं की भाषा ‘अंग्रेजी’ का उपयोग हो रहा है। जहां पर गुलाम बनाने वाले इंग्लैंड, फ्रांस आदि देशों की भाषा का प्रत्यक्ष रूप से उपयोग नहीं होता; परंतु वहाँ पर भी उन गुलाम रहे देशों ने अपनी भाषा को, यूरपीन देशों की ‘लातीनी’ लिपि में लिखना शुरू कर दिया है। इस प्रकार से, लिपि के रूप में इन अनैतिक, अधर्मी देशों की भाषा; वहाँ पर सदा के लिए स्थापित हो गई है। संभव है: उन देशों की लिपि, इन अधर्मी यूरपीय देशों की लिपि जैसी विकसित न हो। यदि ऐसा भी था, तो उन देशों को इन पापी यूरपीय देशों की लिपि अपनाने की बजाए, अपनी नई लिपि बना लेनी चाहिए थी। क्योंकि, इन यूरपीय देशों की लिपि अपनाने के कारण, उन देशों की अपनी लिपि के जो अक्षर थे; वह सदा के लिए लुप्त हो गए हैं। अन्य देशों पर अपना साम्राज्य स्थापित कर के, उन्हें गुलाम बनाने वाले इन अधर्मी, पापी देशों की लिपि: सदा के लिए उन गुलाम रह चुके देशों की संस्कृति का अभिन्न अंग बन गई है। जैसे: मलेशिया की अपनी लिपि‘पलावा’ थी। इंग्लैंड के शासन कारण; मलेशिया की अपनी ‘पलावा’ लिपि लुप्त हो कर, वहाँ अंग्रेजी लिपि(लातीनी रूपांतरण में)प्रचलित हो गई है। ‘मलई’ भाषा आजकलअंग्रेजीलिपि में लिखी जाने लगी है। इसी तरह, वियतनाममें फ्रांसीसी शासन के कारण, उन की अपनी ‘वियतनामी’ भाषा, ‘Chử Khoa Đầu’ की बजाय, अधिकारित रूप से फ्रेंच (लातीनी रूपांतरण) में लिखी जाने लगी है।

केवल अंग्रेजी ही नहीं; जहां पर अरबी भाषा वालों ने अपना साम्राज्य स्थापित किया है, वहाँ पर उन का शासन हटने के उपरांत भी; उन की लिपि व भाषा, किसी न किसी रूप में उन देशों में प्रचलित हो गई है। भारत में भी ‘अरबी’ देशों के प्रभाव कारण, अरबी लिपि आधारित एक नई ‘उर्दू’ भाषा बन कर स्थापित हो गई है। आम जनता को तो विदेशी भाषा के शब्दों का प्रयोग करते हुए पता ही नहीं चलता। उदाहरण स्वरूप: अरबीभाषा के शब्द औलाद, अक्ल, खबर, अमीर, गरीब, मालिक, औरत, मुहब्बत आदि, भारत में इस तरह प्रचलित हो चुके हैं कि भारतवासियों को पता ही नहीं कि यह विदेशी ‘अरबी’ भाषा के शब्द हैं; भारतीय भाषा के नहीं। इसी तरहसौरी, थैंक यू, प्लीज, सर, मैडम, रोड आदि शब्द, विदेशी ‘अंग्रेजी’ भाषा के होते हुए भी; भारतीय लोगों की बोलचाल का अभिन्न अंग बन गए हैं। इस के विपरीत, उपरोक्त प्रचलित विदेशी शब्दों के समानांतर, भारतीय भाषाओं के शब्द तो आम जनता भूल चुकी है। जैसे:संतान, बुद्धि, समाचार, धनी, निर्धन, स्वामी, नारी, प्रेम, क्षमा, धन्यवाद,  कृपया, श्रीमान, श्रीमती, मार्ग, आदि।

भारतीय भाषा के शब्दों का उपयोग: इंग्लैंड, अमरीका आदि यूरपीन देशों में प्रचलित नहीं हुआ। क्योंकि, नैतिक व धर्मी होने के कारण, भारत ने उन देशों को गुलाम बना कर, वहाँ अपना साम्राज्य स्थापित नहीं किया। जिस कारण, भारतीय भाषाएं तो भारत में ही लुप्त हो कर, समाप्त होती जा रही हैं। जब कि अनैतिक, अधर्मी (दूसरों को गुलाम बनाने वाले) इंग्लैंड की भाषा ‘अंग्रेजी’: पूरे विश्व में प्रफुल्लित हो रही है और बहुत सारे देशों में अधिकारित रूप से अपनाई भी जा चुकी है। जैसे: स्वतंत्र होने के 77 वर्ष उपरांत भी भारत सरकार के सभी कार्य ‘अंग्रेजी’ में ही होते हैं। इसी तरह, विश्व के 195 देशों में से 55 देशों में, स्वतंत्र होते हुए भी, अधिकारित रूप से सभी सरकारी कार्य ‘अंग्रेजी’ में ही होते हैं; जब कि, 100 से अधिक देशों में तो अन-अधिकारिक रूप से भी ‘अंग्रेजी’ का उपयोग हो रहा है।उपरोक्त लिखे से यह पूर्णतः प्रत्यक्ष होता है “यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता; तो सभी देशों में अधिकारित रूप सेसभी सरकारी कार्य, भारतीय भाषा में ही किए जाते”!

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:- राजपाल कौर +91 9023150008, तजिंदर सिंह +91 9041000625, रतनदीप सिंह +91 9650066108.

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JR Choudhary JR Choudhary serves as the Editor of Marudhar Bharti, where he leads the editorial team with a focus on accuracy, transparency, and public interest journalism. With over 8 years of hands-on experience in the media industry, he has developed a deep expertise in news analysis, regional reporting, and editorial management. His core mission is to uphold the highest standards of journalistic ethics while delivering stories that matter to the public.