पारूल विश्वविद्यालय, गोवा में परंपरा और एकजुटता के साथ मनाया गया सांस्कृतिक नवरात्रि उत्सव

Tue, 20 Oct 2026 09:46 AM (IST)
Tue, 20 Oct 2026 02:19 PM (IST)
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पारूल विश्वविद्यालय, गोवा में परंपरा और एकजुटता के साथ मनाया गया सांस्कृतिक नवरात्रि उत्सव
पारूल विश्वविद्यालय, गोवा में परंपरा और एकजुटता के साथ मनाया गया सांस्कृतिक नवरात्रि उत्सव

पणजी (गोवा) : एक कैंपस में होनेवाली संस्कृति की समृद्धि को दर्शाते हुए पारूल विश्वविद्यालय, गोवा में इस वर्ष नवरात्रि उत्सव मनाया गया| इसमें रंगीन गरबा की उल्हासभरी शाम के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ की गईं तथा इस उत्सव के पव में 1000 से अधिक छात्रों ने सहभाग लिया| संस्कृति में भिन्नता के साथ एकजुटता दर्शानेवाले नवरंग संस्कृतियों को सम्मानित करते हैं और इस कारण से नवरात्रि सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का उमंग, संगीत और नृत्य् से भरपूर एक पर्व बन गया| इस उत्सव में नवरंग की‌ थीम केन्द्र स्थान पर रही और लोगों को जोड़नेवाली भारत की सम्पन्न संस्कृति और परंपराओं को इसमें दर्शाया गया| हर रंग का अपना एक अर्थ है और इसके द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक अभिव्यक्ति दर्शायी जाती है| साथ ही, अपने विशिष्ट नृत्य के साथ गरबा इस उत्सव के उमंग, ख़ुशी एवम् उल्हास को दर्शाता है|

आदरणीय मंत्री एवम् काणकोण क्षेत्र के विधायक डॉ. रमेश बी. तवाडकर ने इस समारोह में अपनी उपस्थिति दी तथा गरबा रास में सहभाग ले कर लोगों का उत्साह भी बढ़ाया| इस समारोह में कई संस्कृतियों का संगम देखने को मिला जो कि नवरात्रि का वास्तविक अर्थ भी है| उपस्थित लोगों से संवाद करते हुए डॉ. तवाडकर ने कहा, “नवरात्रि जैसा उत्सव भारत की सांस्कृतिक विविधता तथा सभी पीढ़ियों को साथ जोड़नेवाली परंपरा दर्शाता है| नवरंग जैसे उमंगभरे पर्व से हम इस परंपरा को जीवित रखते हैं तथा लोक संगीत, परंपरागत नृत्य और समान संस्कृति की नीव के साथ लोगों को इकठ्ठा लाते हैं| ऐसे उल्हास और अभिमान के साथ युवा हमारी सांस्कृतिक विरासत को अपनाते हुए देख कर बहुत ख़ुशी होती है|”

शैक्षिक प्रक्रिया में सांस्कृतिक उत्सवों के महत्त्व के बारे में बताते हुए पारूल विश्वविद्यालय, गोवा के अध्यक्ष डॉ. देवांशू पटेल ने कहा, “शिक्षा सिर्फ वह नही है जो छात्र क्लासरूम में पढ़ते हैं| वह ऐसे अनुभव भी‌ हैं जिनके द्वारा छात्रों को उनकी परंपरा, उनकी संस्कृति की सीख और लोगों के साथ जुड़ने के अवसर भी मिलते हैं| नवरंग जैसे सांस्कृतिक समारोह उन्हे यह अनुभव प्रदान करते हैं और उन्हे हमारी विरासत का एहसास भी देते हैं|”

इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए एक छात्रा कु. माही बेरिया ने कहा, “नवरंग बहुत ही अनुठा था और ऊर्जा, संगीत और उल्हास से भरपूर था| इससे यह पूरा समारोह अविस्मरणीय बन गया|” अन्य एक छात्र श्री. श्रीयांश नार्वेकर ने कहा, “इस समारोह में पहली बार मैने ऐसा कुछ देखा जिसमें अलग अलग पृष्ठभूमि के छात्र एक ही संस्कृति के रंग में रंग गए थे| इस समारोह से हमें वास्तविक नवरात्रि की संस्कृति का अनुभव मिल सका|”

लोगों को साथ ला कर परंपरा का संवर्धन करने का साधन बनाते हुए पारूल विश्वविद्यालय, गोवा ने “नवरंग- ए सिंफनी ऑफ कल्चर” का आयोजन किया गया| सांस्कृतिक सजगता और एकजुटता को बढ़ावा देने हेतु किस प्रकार से विश्वविद्यालय छात्रों को अनुभव प्रदान करना चाहता है, इसका एक उदाहरण यह महोत्सव था| गरबा, संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के पर्व के साथ भारतीय विरासत के कई रंगों को मनाते हुए और नवरात्रि को जीवित करते हुए यह उत्सव पर्व सम्पन्न हुआ|

JR Choudhary JR Choudhary serves as the Editor of Marudhar Bharti, where he leads the editorial team with a focus on accuracy, transparency, and public interest journalism. With over 8 years of hands-on experience in the media industry, he has developed a deep expertise in news analysis, regional reporting, and editorial management. His core mission is to uphold the highest standards of journalistic ethics while delivering stories that matter to the public.