जेकेसी फाउंडेशन ने लॉन्च किया 'ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक' अभियान

Fri, 16 Oct 2026 12:20 PM (IST)
Fri, 16 Oct 2026 06:31 PM (IST)
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जेकेसी फाउंडेशन ने लॉन्च किया 'ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक' अभियान
जेकेसी फाउंडेशन ने लॉन्च किया 'ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक' अभियान

पहल का उद्देश्य स्कूलों, उच्च शिक्षा संस्थानों और कार्यस्थलों में डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, ताकि किसी की क्षमता को प्रयास की कमी न समझा जाए

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर : कई कक्षाओं में कोई न कोई ऐसा बच्चा होता है जो किसी मशीन के काम करने का तरीका बखूबी समझा सकता है, अनोखी कहानियाँ गढ़ सकता है या ऐसी पहेली सुलझा सकता है जिसे कोई और नहीं सुलझा पाता, लेकिन जब उससे ज़ोर से पढ़ने को कहा जाता है तो वह ठिठक जाता है। उससे कहा जाता है कि और मेहनत करो, ज़्यादा अभ्यास करो, ध्यान लगाओ। धीरे-धीरे बच्चा यह मानने लगता है कि कमी उसी में है।

● विभिन्न अभियानों और आउटरीच कार्यक्रमों के ज़रिए अगले 5 वर्षों में 10 लाख लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य

डिस्लेक्सिया से जूझ रहे कई बच्चों के लिए असली संघर्ष यहीं से शुरू होता है। यह संघर्ष कठिनाई से नहीं, बल्कि उस आत्मविश्वास के खोने से पैदा होता है जो इस स्थिति के समय पर पहचाने न जाने से टूटने लगता है। इसी कमी को दूर करने के लिए जे.के. सीमेंट लिमिटेड की परोपकारी शाखा जेकेसी फाउंडेशन ने ‘ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक’ (Brilliantly Dyslexic) के शुभारंभ की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य डिस्लेक्सिया के प्रति व्यापक जागरूकता और समझ विकसित करना तथा ऐसा समावेशी वातावरण तैयार करना है, जहाँ लोग अपनी खूबियों को पहचान सकें और अपनी क्षमताओं को साकार कर सकें।

डॉ. राघवपत सिंघानिया और श्रीमती सोनम सिंघानिया द्वारा स्थापित ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक उनके उस विज़न को साकार करता है, जिसके केंद्र में एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है जो डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोगों को उनकी यात्रा के हर पड़ाव पर सहयोग दे। इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए जेकेसी फाउंडेशन ने ऑर्किड्स फाउंडेशन (Orkids Foundation) के साथ साझेदारी की है, ताकि डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोगों के लिए जागरूकता और सहयोग को मिलकर मज़बूत किया जा सके। इस पहल का मूल उद्देश्य डिस्लेक्सिया को एक सीमा के रूप में देखने के बजाय सीखने के एक अलग तरीके के रूप में देखने की सोच विकसित करना है, जिसे सही सहयोग और प्रोत्साहन से निखारा जा सकता है। विभिन्न अभियानों और आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से यह पहल 5 वर्षों में 10 लाख लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य रखती है।

पहल के बारे में बात करते हुए जे.के. सीमेंट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक के संस्थापक डॉ. राघवपत सिंघानिया* ने कहा, *”हर बच्चा अलग तरीके से सीखता है, लेकिन अक्सर हम सीखने के अलग तरीके को क्षमता या प्रयास की कमी मान बैठते हैं। जिस बच्चे को शुरुआत में ही समझा नहीं जाता, वह अपनी असली क्षमताओं के सामने आने से बहुत पहले ही खुद पर भरोसा खो सकता है। यही इस पहल को शुरू करने की वजह है। हमारा विज़न हमेशा से ऐसे अवसर तैयार करना रहा है जो लोगों को अपनी क्षमता को साकार करने में सक्षम बनाएँ, और ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक इसी दिशा में एक कदम है।”*

इसमें जोड़ते हुए ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक की सह-संस्थापक श्रीमती सोनम सिंघानिया ने कहा,* *”जब हम अंतर को शुरुआत में ही पहचान लेते हैं और सही सहयोग देते हैं, तो खूबियों और रचनात्मकता को फलने-फूलने का अवसर मिलता है। हम अधिक समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना चाहते हैं, ताकि डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोगों की पहचान इस बात से न हो कि वे कैसे सीखते हैं, बल्कि इस बात से हो कि वे क्या योगदान दे सकते हैं।”*

ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक के माध्यम से जेकेसी फाउंडेशन का लक्ष्य, विशेषकर स्कूलों में, डिस्लेक्सिया की शुरुआती पहचान को प्रोत्साहित करना और सीखने की विविध ज़रूरतों को ध्यान में रखने वाली शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना है, ताकि शिक्षक, अभिभावक और छात्र सही समय पर सही सहयोग दे सकें।

भारत सरकार की प्रगतिशील नीतियाँ, जिनमें दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 शामिल हैं, सीखने संबंधी अक्षमताओं (लर्निंग डिसेबिलिटी) की शुरुआती पहचान और सहयोग को अनिवार्य बनाकर एक मज़बूत आधार तैयार करती हैं। ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक इसी दूरदर्शी ढाँचे को आगे बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित करना चाहता है कि इनका लाभ देश के हर बच्चे तक पहुँचे। शुरुआती स्क्रीनिंग से लेकर ज़रूरत के अनुरूप सुधारात्मक सहायता (रेमेडिएशन) और प्रगति की निगरानी तक एक सुगम, बहुवर्षीय व्यवस्था तैयार करके यह पहल छात्रों को समावेशी कक्षाओं में आगे बढ़ने में सक्षम बनाती है, और साथ ही एक अधिक मज़बूत और समतापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली के निर्माण में योगदान देती है।

यह पहल समावेशन के प्रति समग्र दृष्टिकोण अपनाती है और मानती है कि सहयोग स्कूल के दायरे से आगे भी जारी रहना चाहिए। जब छात्र उच्च शिक्षा और फिर कार्यस्थल की ओर बढ़ते हैं, तब ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक का लक्ष्य सुलभ शिक्षण पद्धतियों, सहायता प्रणालियों और ऐसे कार्य-वातावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, जो लोगों को उनकी खूबियों के बल पर योगदान देने का अवसर दें। यह पहल संस्थानों और संगठनों को सीखने, संवाद करने और समस्याएँ सुलझाने के विविध तरीकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनने के लिए भी प्रेरित करती है।

जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक डिस्लेक्सिया को लेकर होने वाली चर्चा की दिशा भी बदलना चाहता है। यह उस रचनात्मकता, जिज्ञासा और अनूठे दृष्टिकोण को सामने लाता है, जो डिस्लेक्सिया से प्रभावित लोग कक्षाओं, कैंपस और कार्यस्थलों में लेकर आते हैं।

JR Choudhary JR Choudhary serves as the Editor of Marudhar Bharti, where he leads the editorial team with a focus on accuracy, transparency, and public interest journalism. With over 8 years of hands-on experience in the media industry, he has developed a deep expertise in news analysis, regional reporting, and editorial management. His core mission is to uphold the highest standards of journalistic ethics while delivering stories that matter to the public.