गर्मागर्म माहौल के बीच कल्कि सेना के कमांडो की अचूक सुरक्षा में हुई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की धर्मयुद्ध यात्रा

Mon, 16 Mar 2026 03:55 PM (IST)
Mon, 16 Mar 2026 03:57 PM (IST)
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गर्मागर्म माहौल के बीच कल्कि सेना के कमांडो की अचूक सुरक्षा में हुई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की धर्मयुद्ध यात्रा
गर्मागर्म माहौल के बीच कल्कि सेना के कमांडो की अचूक सुरक्षा में हुई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की धर्मयुद्ध यात्रा

लखनऊ / वाराणसी | विशेष रिपोर्ट : परमपूज्य परमधर्माधीश ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज की पांच दिवसीय गो-प्रतिष्ठा यात्रा वाराणसी से प्रारंभ होकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होती हुई 11 मार्च को लखनऊ पहुंची।

 

इसके साथ ही यात्रा के दौरान शंकराचार्य जी की सुरक्षा को लेकर भी व्यापक चिंता रही।

 

इसी को ध्यान में रखते हुए विंग कमांडर (डॉ) पुष्कल विजय द्विवेदी (से) के नेतृत्व में कल्कि सेना के प्रशिक्षित कमांडोज ने शंकराचार्य जी को यात्रा के दौरान तीन स्तरीय सुरक्षा प्रदान की। बड़ी संख्या में जनसमूह, लगातार कार्यक्रम और विभिन्न जिलों में यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए थे।

 

कल्कि सेना ने संभाली सुरक्षा की जिम्मेदारी

 

कल्कि सेना के प्रमुख विंग कमांडर (डॉ) पुष्कल विजय द्विवेदी के नेतृत्व में संगठन के कमांडो पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में सक्रिय रूप से तैनात रहे। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जी की सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील विषय है और इसके लिए सैन्य अनुशासन, रणनीतिक योजना और समन्वित व्यवस्था की आवश्यकता होती है।

 

उनके अनुसार शंकराचार्य जी की सुरक्षा के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली (Three Layer Security System) लागू की गई थी।

 

पहली और सबसे अंदरूनी सुरक्षा परत में कल्कि सेना के प्रशिक्षित कमांडो वर्दी में तैनात थे, जो शंकराचार्य जी के बिल्कुल निकट रहते हुए लगभग एक हाथ की दूरी पर सुरक्षा घेरा बनाए हुए थे। इन कमांडोज का मुख्य कार्य शंकराचार्य जी के आसपास की तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करना था। इनके पास बुलेटप्रूफ शील्ड जैसे आधुनिक सुरक्षा उपकरण थे जो शंकराचार्य जी को जानलेवा हमले तक से बचाने की क्षमता रखते हैं ।

 

दूसरी यानी मध्य सुरक्षा परत में कल्कि सेना के स्वयंसेवक धार्मिक वेशभूषा में मौजूद थे। उनका कार्य आसपास मौजूद लोगों और गतिविधियों पर नजर रखना तथा लगभग 15 से 20 फीट की दूरी से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना था।

 

तीसरी और बाहरी सुरक्षा परत में सादे नागरिक कपड़ों में स्वयंसेवक तैनात थे। ये स्वयंसेवक 70 से 300 मीटर की दूरी तक क्षेत्र में निगरानी रखते हुए किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा दल तक पहुंचा रहे थे।

 

इस पूरी व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति शंकराचार्य जी के अत्यधिक निकट न आ सके।

 

पुलिस प्रशासन का कार्यभार भी हुआ कम

 

कल्कि सेना के प्रमुख विंग कमांडर पुष्कल विजय द्विवेदी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि शंकराचार्य जी की सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील विषय है और यदि किसी प्रकार की सुरक्षा चूक होती तो इससे न केवल शंकराचार्य जी बल्कि प्रदेश और केंद्र सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंच सकता था।

 

कल्कि सेना के सुरक्षा दल ने न केवल शंकराचार्य जी के काफिले को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया बल्कि कई स्थानों पर यातायात प्रबंधन और मार्ग सुरक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

 

कांशीराम उपवन में विशाल सभा

 

11 मार्च को लखनऊ के मान्यवर कांशीराम उपवन में आयोजित विशाल जनसभा के दौरान भी कल्कि सेना के योद्धा स्वयंसेवक पूरी तरह सक्रिय रहे। भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

 

कौन हैं विंग कमांडर पुष्कल विजय द्विवेदी

 

कल्कि सेना के प्रमुख विंग कमांडर पुष्कल विजय द्विवेदी भारतीय वायुसेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं। भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर का पद एक वरिष्ठ रैंक माना जाता है, जिसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी कई मामलों में पुलिस के डीआईजी (DIG) स्तर के समकक्ष समझी जाती है।

 

उन्होंने लगभग दो दशकों तक भारतीय वायुसेना में सेवा दी और अपने सैन्य करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों में भूमिका निभाई तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उच्च स्तरीय मामलों में सक्रिय योगदान दिया। वे बालाकोट स्ट्राइक ऑपरेशन में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। वे देश के जाने माने रक्षा, रणनीति और राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर विभिन्न राष्ट्रीय टीवी चैनलों में देखे जा सकते हैं ।

 

शैक्षणिक रूप से भी उनका व्यापक अध्ययन रहा है। उन्होंने सुरक्षा प्रबंधन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र एवं पुलिस प्रबंधन में एम.ए. किया है तथा मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, अहमदाबाद (MICA), IIM अहमदाबाद, IIM मुंबई, ISB हैदराबाद, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (ब्रिटेन) और येल विश्वविद्यालय (अमेरिका) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी विशेष उच्च शिक्षा कार्यक्रमों में अध्ययन किया है।

 

विंग कमांडर पुष्कल विजय द्विवेदी ने समाज और राष्ट्र के लिए खुलकर कार्य करने के उद्देश्य से समयपूर्व सेवानिवृत्ति (Premature Retirement) ली और उसके बाद सामाजिक एवं वैचारिक गतिविधियों में सक्रिय हो गए।

 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के राष्ट्रीय राजनीतिक जनसंपर्क प्रमुख हैं द्विवेदी

 

विभिन्न जिम्मेदारियों के साथ , 2023 से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी ने विंग कमांडर पुष्कल द्विवेदी को राष्ट्रीय राजनीतिक जनसंपर्क प्रमुख नियुक्त किया हुआ है। इस रूप में उनका प्रमुख कार्य है सभी राजनीतिक दलों और बड़े राजनीतिक नेताओं से मिलकर गौमाता को राष्ट्र माता घोषित करने का समर्थन लेना और गो हत्या को पूर्णतः बंद कराने का प्रयास करना। इस क्रम में द्विवेदी भाजपा , कांग्रेस , समाजवादी पार्टी सहित अन्य कई दलों के शीर्ष नेतृत्व से मिल कर मंत्रणा कर चुके हैं। इन मंत्रणाओं का एकमात्र उद्देश्य गाय को पशु की सूची से हटाकर राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाना है।

 

मंदिरों और संतों की सुरक्षा है प्राथमिक उद्देश्य

 

उन्होंने बताया कि कल्कि सेना प्रशासन और सरकार के साथ सहयोग करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों में भी सहायता प्रदान करती है।

 

पूरे कार्यक्रम की अवधि में कल्कि सेना के एडजुटेंट जनरल गौरव पांडेय भी सुरक्षा प्रबंधन में सक्रिय रूप से तैनात रहे। उन्होंने बताया की कल्कि सेना में कोई भी हिंदू पुरुष या स्त्री कल्कि सेना की वेबसाइट के माध्यम से शामिल हो सकते हैं ।

 

क्या है कल्कि सेना

 

कल्कि सेना सैन्य परिपाटी में संगठित स्वयंसेवी संगठन है जिसका उद्देश्य अनुशासित और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का ऐसा नेटवर्क तैयार करना है जो आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन, पुलिस , सेना और अन्य आपात सेवाओं की सहायता कर सके। पूर्व वरिष्ठ सैन्य और पुलिस अधिकारियों द्वारा गठित इस संगठन का लक्ष्य सनातन धर्म के मंदिरों, संतों और धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा के साथ-साथ समाज में सेवा, अनुशासन और जागरूकता की भावना को मजबूत करना है।

 

कल्कि सेना का नाम लंदन बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में विश्व के सबसे बड़े युद्धक स्वयंसेवी संगठन के रूप में दर्ज है ।

 

कल्कि सेना से जुड़ने की या संगठन की अधिक जानकारी आधिकारिक वेबसाइट http://www.kalkisena.co.in पर उपलब्ध है।

JR Choudhary JR Choudhary serves as the Editor of Marudhar Bharti, where he leads the editorial team with a focus on accuracy, transparency, and public interest journalism. With over 8 years of hands-on experience in the media industry, he has developed a deep expertise in news analysis, regional reporting, and editorial management. His core mission is to uphold the highest standards of journalistic ethics while delivering stories that matter to the public.